कितना ही सम्भालो, ये दिल बार बार टूट जाता है
कुछ खाली सा हैं यहाँ , जाने क्यों हर बार हाथ से हाथ छूठ जाता हैं
आँखें ये भर भर जाती हैं, और ये दिल.... खाली रह जाता हैं
कुछ तो मर्ज़ी हैं ऊपर वाले की, ना जीया जाता हैं ना मरा जाता हैं
एक इंतज़ार हैं उस्का और एक ये ज़िन्दगी जो ख़तम नहीं होता
और एक ये मेरा दर्द जो अब बर्दाश्त नहीं होता|
कुछ खाली सा हैं यहाँ , जाने क्यों हर बार हाथ से हाथ छूठ जाता हैं
आँखें ये भर भर जाती हैं, और ये दिल.... खाली रह जाता हैं
कुछ तो मर्ज़ी हैं ऊपर वाले की, ना जीया जाता हैं ना मरा जाता हैं
एक इंतज़ार हैं उस्का और एक ये ज़िन्दगी जो ख़तम नहीं होता
और एक ये मेरा दर्द जो अब बर्दाश्त नहीं होता|
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